उधार दिया जाएगा
एक 10 साल के बच्चे की महँगाई से जंग
मैं घर का सबसे छोटा सदस्य हूँ , यानी माताजी हैं और बड़ी बहन है फिर मैं , उम्र है कुछ 9-10 साल , भोपाल में घरके छोटे बेटे को ज़िम्मेदारी का पहला एहसास तब होता है , जब उसको पास वाली दूध की दुकान से कुछ सामान अकेले लाने के लिए कह दिया जाये , 10 रुपये के नोट को वो मुट्ठी में इस कदर दबोच के दुकान की और बढ़ता है जैसे पूरी दुनिया इस वक्त उन १० रुपयों पर ही केंद्रित है , मेरे जीवन में ये ज़िम्मेदारी अभी नई नई आई है , पास वाले दूध की दुकान से मुझे 6 rupay वाले पीली पन्नी के दूध को शाम की चाय के वक़्त घर पर लाने को कहा जाने लगा है , जीवन में बहुत से शब्द आपको कोई सिखाता नहीं है , आप ख़ुद ब ख़ुद सीख के उनको अपने दिमाग़ में सकारात्मक या नकारात्मक श्रेणी में डाल देते हैं , जैसे की उधार शब्द को हमेशा ही नकारात्मक श्रेणी में रखा गया है , जिसने उधार लेके खाया है वो भी इसे सकारात्मक श्रेणी में नहीं रखेगा , और जिससे उधार लिया गया है उसका तो क्या ही कहें , मैंने अपने मोहल्ले की एक दुकान में , पिक्चरों में , नोटिस बोर्ड्स पर हमेशा ये लेख लिखा हुआ देखा है “ आज नगद कल उधार “ , मेरी उमर इतनी कम थी की बहुत साल तक मुझे ये गुत्थी सुलझाने में लगे की अगर कल उधार मिल रहा है तो लेने वाला कल क्यों नहीं आजाता , मैंने मेरी माताजी के सामने इस सवाल को उजागर किया , माताजी के चेहरे के भाव से समझ गया कि उनको ये समझ आगया है की उनका लड़का उनकी उम्मीदों से ज़्यादा मूर्ख निकल गया है ।
उधार शब्द को सुनते से दिमाग़ में था की ये एक ऐसी चीज़ है जो कोई देना नहीं चाह रहा , जब जीवन की प्रथम ज़िम्मेदारी , वही पीली पन्नी वाले दूध के पैकेट लाने की मुझे दी गई , तो घर के पास वाली दूध की दुकान पर मेरा जाना चालू हुआ , जैसा कि आप भोपाल में जानते हैं सरकारी मोहल्ले की दूध की दुकान पर दूध के अलावा सब कुछ मिलता है , सफेद ब्रेड , ब्राउन ब्रेड , बिस्किट , लोकल चिप्स इत्यादि , मैं दुकान के सामने खड़ा हूँ , मेरा क़द इतना छोटा है की ब्रेड के पैकेट्स मेरे सामने हैं और मुझे दुकान के अंदर का कुछ दिखा नहीं दे रहा , लेकिन १० रुपये का नोट बढ़ा कर मैं दूध लेने की प्रक्रिया को प्रारंभ करता हूँ , दुकान में एक बोर्ड लगा है ‘ उधार दिया जाएगा “ मैं इतना अचंभित हूँ कि ये दुकान वाला कितना देवता किस्म का है कि एक तो उधार दे रहा है वो भी बोर्ड लगा के , मेरी उमर इतनी तो नहीं है कि उधार माँग सकूँ , लेकिन रोज़ उस दुकान पर वो बोर्ड देख के प्रसन्न होता हूँ , मेरी उमर और क़द दोनों बढ़ते जा रहे हैं , कुछ महीनों बाद मुझे ब्रेड के पैकेट्स से थोड़ा ऊपर दिखने लगा है , अब मुझे उस बोर्ड का आगे का हिस्सा भी नज़र आने लगा है , अब पीला दूध का पैकेट 8 रुपये का होगया है , मैंने अब २ रुपये का हिसाब देना बंद करदिया है , एक नई टॉफ़ी आई है जिसका स्वाद आम की कैरी जैसा है और आखरी में उसके अंदर से मसाला भी निकलता है , दुकान के बोर्ड पर अब थोड़ा और दिखने लगा है वहाँ लिखा है “ उधार दिया जाएगा , लेकिन 70-80 साल के लोगो को “ मैंने कहा अच्छा हुआ मैंने उधार की बात इससे नहीं करी वरना थू थू होजाती , लेकिन फिर भी घाटे का सौदा तो नहीं है , मोहल्ले में कितने 70-80 साल के लोग हैं जो आलतू फालतू चीज़ें माँगते हैं , उधार ही माँग लें , ये दे रहा है , कुछ महीने और बीत ते गए , अब दूध का पैकेट 9 रुपये का हो गया है , पहले 2 टॉफ़ी आजाती थी जबतक 6 का था , दिनभर का काम हो जाता था , अब 1 रुपये बचते हैं , एक ही ले पाता हूँ ,तरबूज़ के फ्लेवर की च्युइंग गम ले लेता हूँ जो लंबी चले और , अब मुझे ब्रेड के पैकेट्स के ऊपर से दिखने लगा है , मैं लंबा होता जा रहा हूँ , मुझे ये डर है की दूध का पैकेट 10 रुपये का ना हो जाए , क्यूंकि तब तो घरवाले 10 का नोट देंगे और ये पूरा नोट ले लेगा , महंगाई और इन्फ्लेशन के इस नजरिये के बारे में आपने सोचा है कभी ? दूध के दाम बढ़ने से पनीर , मिठाइयों , चॉकलेटों के धंधे पे असर होता है , लेकिन एक 10 साल के लड़के की च्युइंग गम भी बंद हो जाती है , ये किसी ने नहीं सोचा , आज मैं दुकान पहुँचा तो लंबा हो चुका था , ब्रेड के पैकेट्स नीचे थे , मेरी नज़र उस बोर्ड पर पड़ी , अब मुझे वो बोर्ड पूरा दिख रहा था , उस पर लिखा था “ उधार दिया जाएगा , लेकिन 70-80 साल के लोगो को , वो भी उनके माता पिता से पूछ कर “ मैंने दुकान दार की कलात्मकता को प्रणाम किया और मन ही मन सोचा की महाकवि आपका स्थान तो ज्ञानपीठ पर है , आप यहाँ दूध की एजेंसी लेकर क्या कर रहे हैं , मैंने १० रुपये दिए और उसने मुझे सिर्फ़ पीले पन्नी का दूध , मैंने चिल्लर माँगी उसने बताया कि दूध १०rs का हो गया है , मेरी च्युइंग गम बंद हो गई ।

pta nhi kyo ye padhte hue kullu ji ki awaz apne aap dimag mei chl jati h
Kullu bhai, you can write a book based on Hindi sahitya kahaniya tatha Parichay.